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सोमवार, 7 जुलाई 2014

वेद : प्राप्त करें, पढ़ें और जानें



     भारतीय चिन्तन का ग्रन्थ रूप सबसे पहले वेदों में मिलता है। ऋग्वेद विश्व का सबसे पहला ग्रंथ है। वेद, ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक और उपनिषद्, यह वैदिक साहित्य हैं। वेद चार हैं ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। ऋग्वेद में इन्द्र, अग्नि, विष्णु, मित्रा और वरुण जैसे देवताओं की स्तुतियाँ हैं, और कई दार्शनिक तथा सामाजिक चिन्तन हैं। यजुर्वेद में यज्ञ करने तथा अन्य यज्ञ संबंधी विषयों पर विचार है। सामवेद गायन विद्या का आधार है। ऋग्वेद की ऋचाओं को साम के रूप में सामवेद में प्रस्तुत किया गया है। अथर्ववेद में सामाजिक और राजनैतिक विषय , रोगनिवारक आदि विविध मन्त्र हैं। 

     हम में से बहुत से सुधी जन वेदों का अध्ययन करना चाहते हैं, जानना चाहते हैं कि वेदों में क्या है | इस संबंध में बहुत विस्तार में ना जाते हुए कुछ मूलभूत बातों को जानना आवश्यक है : 

· वेदों को किसी मनुष्य ने नहीं रचा है, इसलिये इनको “अपौरुषेय” कहा जाता है । 

· वेदों में जो मन्त्र हैं उन्हें “ऋचा” कहते हैं , इनकी भाषा संस्कृत का वैदिक रूप है । 

· वेदों के मन्त्रों का समुच्चय संहिता कहलाता है , यथा “ऋग्वेद संहिता , यजुर्वेद संहिता .....”

· किसी मन्त्र, ऋचा का ज्यों का त्यों स्वरूप “मूल” या “यथारूप” कहलाता है। इसके अनुवाद मात्र को सरल अर्थ, भावार्थ या मात्र अर्थ भी कहा जाता और जब पाठक-वाचक को समझाने की दृष्टि से इस अनुवाद का अन्य ग्रन्थों से सन्दर्भ लेते हुए सविस्तार भाव-पल्लवन किया जाता है तो उसे “भाष्य, तिलक या टीका ” कहते हैं ।  ( यह बात मात्र वेदों के लिये ही नहीं अपितु सभी ग्रन्थों के सन्दर्भ में कही गई है ) 

     इसके बाद यह प्रश्न उठ खड़ा होता है कि अध्ययन हेतु वेदों की उपलब्धता कैसे हो ? संस्कृत, विशेषत: वैदिक संस्कृत को समझना सरल नहीं हैं ।  इसलिए मूल मन्त्रों के साथ उनका अर्थ और भाष्य अगर हिन्दी में प्राप्त हो जाए तो जिज्ञासु सुगमतापूर्वक उनका अध्ययन कर सकते हैं, बहुत से विद्वानों का तो यहाँ तक कहना है कि वेद-मन्त्रों का अर्थ भी गूढार्थ ही है, फिर भी कुछ विद्वानों ने इस महती कार्य को सम्पन्न किया है।  इस लेख में आगे आपको इंटरनेट पर उपलब्ध वेदों ( मूल सभाष्य ) के हिन्दी प्रकाशन, उनके भाष्यकार और उनके प्राप्ति स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं : 

1 . स्वामी दयानन्द सरस्वती : इनके द्वारा प्रस्तुत “ऋग्वेद” व “यजुर्वेद” का भाष्य ( इनके द्वारा प्रस्तुत अन्य वेदों का भाष्य उपलब्ध नहीं है ) , स्वामी दयानन्द जी द्वारा प्रस्तुत “ ऋग्वेद” भाष्य सात ( 7 ) खंडो में उपलब्ध है, जिनमें ऋग्वेद के दस मंडलों में से सात का ही भाष्य है ।   और “यजुर्वेद” भाष्य चार ( 4 ) खंडो में उपलब्ध है । 

2.. पं. जयदेव शर्मा : इनके द्वारा प्रस्तुत चारों वेदों का भाष्य उपलब्ध है जिनमें “ ऋग्वेद” भाष्य सात ( 7 ) खंडो में है , “यजुर्वेद” भाष्य दो ( 2 ) खंडो में है, “सामवेद” भाष्य एक ( 1 ) खंड में है और “अथर्ववेद” भाष्य चार ( 4 ) खंडो में उपलब्ध है ।  

3. पं. हरिशरण सिद्धान्तालंकार : इनके द्वारा प्रस्तुत चारों वेदों का भाष्य उपलब्ध है जिनमें “ ऋग्वेद” भाष्य सात ( 7 ) खंडो में है , “यजुर्वेद” भाष्य दो ( 2 ) खंडो में है, “सामवेद” भाष्य दो ( 2 ) खंड में है और “अथर्ववेद” भाष्य तीन ( 3 ) खंडो में उपलब्ध है । 

4 . पं. श्रीराम शर्मा “आचार्य” : इनके द्वारा प्रस्तुत चारों वेदों का भाष्य उपलब्ध है ।  ( इनके खंड-विभाजन की चर्चा आगे करेंगे ) 




     उपरोक्त वर्णित चारों भाष्यकारों में से प्रथम तीन (स्वामी दयानन्द सरस्वती,पं.जयदेव शर्मा एवं पं. हरिशरण सिद्धान्तालंकार ) द्वारा प्रस्तुत भाष्यों को http://www.aryamantavya.in/category/download/vedas-hi-download/ से सीधे डाउनलोड कर सकते हैं | यह सभी पूर्ववर्णित खंडानुसार PDF फाइल के रूप में उपलब्ध हैं ।
     
     चौथे भाष्यकार, पं. श्रीराम शर्मा “आचार्य” द्वारा प्रस्तुत भाष्य को सुगमता पूर्वक डाउनलोड कर सकने की दृष्टि से अनेक छोटी-छोटी PDF फाइल के रूप में बाँटा गया है, इन्हें आप http://literature.awgp.org/hindibook/vedPuranDarshan/ से डाउनलोड कर सकते हैं, लेकिन आपको यहाँ पर लॉग इन करना होगा, और इसके लिये आप नि:शुल्क खाता बना सकते हैं , जो कि कठिनता से 5 मिनिट का ही कार्य है । 

     आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप इस जानकारी का लाभ उठाते हुये स्वयं वेदों का अध्ययन करेंगे और अपने मित्रों, संबंधियों को तत्संबंध में प्रेरित करेंगे ।  यह पुस्तकें पीडीऍफ प्रारूप में है, जिसका अध्ययन आप Adobe Reader पर कर सकते हैं | तत्संबंध में कोई समस्या होने पर नि:संकोच सम्पर्क करें ।  

    हमेशा की तरह मुझे आपके अमूल्य सुझावों की बहुत जरूरत है , उम्मीद है आप मुझे इनसे पुरुस्कृत करेंगे । तब तक के लिए आज्ञा दीजिये , अमित के प्रणाम स्वीकार करें..... 





8 टिप्‍पणियां:

  1. अति सुन्दर .. धन्यवाद गृहण करें |

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    1. मा.पल्लवी जी, आपका स्वागत है !!

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  2. सार्थक जानकारी..... सहेजने योग्य पोस्ट

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    1. मा.डॉ.मोनिका शर्मा जी, हार्दिक धन्यवाद !!

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    2. @amit Kumar Ji, डा.मोनिका शर्मा जी, पल्लवी सक्सेना जी, आदरणीय भगिनी एवं भाई जी मुझे चारो वेद मूल रूप में (संस्कृत) में और उनका हिंदी में अनुवाद (टीका,व्याख्या) चाहिए.website का लिंक देने की कृपा करे.

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  3. Kya inme Sanskrit ke original mantra bhi hai jo apne muul roop me ho.... Sanskrit ke mantro ke sath chhed chhad na ki gai ho..... Pls tell me wo mujhe kahan milenge.......

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  4. Kya inme Sanskrit ke original mantra bhi hai jo apne muul roop me ho.... Sanskrit ke mantro ke sath chhed chhad na ki gai ho..... Pls tell me wo mujhe kahan milenge.......

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